“4 साल… फैसलों के, विकास के और इतिहास रचने के: पहली बार उत्तराखंड ने G20 बैठकों से दुनिया में अपनी ताकत दिखाई
“4 साल… फैसलों के, विकास के और इतिहास रचने के: पहली बार उत्तराखंड ने G20 बैठकों से दुनिया में अपनी ताकत दिखाई

पहली बार राज्य में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया गया और जिसमें 3.76 लाख करोड़ से अधिक के निवेश समझौते किए गए जिनमें से करीब 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौतों को धरातल पर उतारने में हम सफल रहे।
इसी का परिणाम है कि डबल इंजन सरकार के बीते चार सालों में हमारे राज्य की आर्थिकी में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
बीते चार वर्षों में हमारे राज्य की प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
बीते चार वर्षों में राज्य बजट का आकार 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।
बीते चार वर्षों में राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं।
बीते चार वर्षों में राज्य में स्टार्टअप की संख्या 7 सौ से बढ़कर साढ़े 17 सौ हो गई है।
बीते चार वर्षों में हेलिपोर्टस की संख्या दो से बढ़कर 12 हो गई है और हेलिपैड की संख्या 60 से बढ़कर 118 हो गई है।
बीते चार वर्षों में राज्य में बिजली उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ा है।
बीते चार वर्षों में 2 लाख 65 हजार से अधिक माताएं-बहनें लखपति दीदी बनी हैं।
बीते चार वर्षों राज्य में होटलों की संख्या में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और होमस्टे की संख्या में भी 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है।
आज डबल इंजन की सरकार के कारण राज्य दोगुनी रफ्तार से प्रगति कर रहा है इसी का परिणाम है कि आज हमारे राज्य ने रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इतना ही नहीं, हमें नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 के सतत् विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के इंडेक्स में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
साथ ही, भारत सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक में वर्ष 2023-24 में विशेष राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
इतना ही नहीं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी भी प्राप्त हुई है।
आज हमें नीति आयोग द्वारा जारी “इंडिया इनोवेशन इंडेक्स रिपोर्ट” में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
हमें बीते चार वर्षों से लगातार देश में ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट होने का गौरव प्राप्त हो रहा है।
आज उत्तराखंड किसानों की आय में वृद्धि करने के साथ-साथ मत्स्य विकास के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बन चुका है।
आज हम युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी देश के अग्रणी राज्य बनकर उभरे हैं।
हम वर्ष 2024 में नीति आयोग द्वारा जारी “एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स” में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुए हैं।
हमें पर्यटन, एविएशन और खेल के विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी “बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम” तथा “बेस्ट विलेज, बेस्ट डिस्ट्रिक्ट” जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।
आज उत्तराखंड को नेशनल लॉजिस्टिक्स इंडेक्स, स्टेट स्टार्टअप इकोसिस्टम, स्टेट एनर्जी एंड ग्रीन इंडेक्स जैसे कई राष्ट्रीय सूचकांकों में भी विभिन्न पुरुस्कार प्राप्त हुए हैं।
हमें खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी “राज्य खनन तत्परता सूचकांक” में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही, इसके लिए राज्य को 200 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।
आज हमारी सरकार द्वारा लिए गए सख्त और पारदर्शी निर्णयों का ही परिणाम है कि आबकारी और खनन जैसे विभागों से राज्य को पहले की तुलना में कई गुना अधिक राजस्व प्राप्त हो रहा है।
हम सभी जानते है पहले हमारे प्रदेश में नकल और पेपर लीक के कारण कितने ही प्रतिभावान युवाओं के सपने चूर-चूर हो जाते थे।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कुचलने के लिए हमने प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया।
जिसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े 4 चार वर्षों में राज्य के 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है, जो पिछली सरकारों के कार्यकाल से चार गुना से भी अधिक हैं।
यही नहीं, आज 100 से अधिक नकल माफिया जेल की हवा खा रहे हैं।
आप लोगों को भलीभांति याद होगा कि कैसे कांग्रेस के समय में पूरा प्रदेश भ्रष्टाचार की जद में हुआ करता था…
पटवारी भर्ती घोटाला, दरोगा भर्ती घोटाला, छात्रवृत्ति घोटाला, एनएच-74 घोटाला, डेनिस घोटाला, राहत सामग्री घोटाला, जैसे अनेकों उदाहरण हमारे सामने हैं।
और जब भ्रष्टाचारियों को पकड़ने की बात आती थी तो केवल छोटे कर्मचारियों को पकड़कर खानापूर्ति कर दी जाती थी।
ऊपर बैठे भ्रष्टाचार के बड़े मगरमच्छों को छूने की किसी में हिम्मत नहीं होती थी।
लेकिन आज हमारी सरकार भ्रष्टाचारियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कड़ी कार्यवाही कर रही है।
अब चाहे कोई छोटा अधिकारी हो या बड़ा अधिकारी हो, यदि भ्रष्टाचार करता है तो उस पर हमारी सरकार कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटती है।
भाईयो-बहनो, हम उत्तराखंड के समग्र विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक अस्मिता, पारंपरिक पहचान और डेमोग्राफिक संतुलन को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए भी संकल्पित होकर कार्य कर रहे हैं।
हमने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।
हमें गर्व है कि हमने राज्य में समान नागरिक संहिता को केवल लागू ही नहीं किया, बल्कि उसे प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने का कार्य भी किया है।
हमने राज्य में सख्त धर्मांतरण और दंगा विरोधी कानूनों को लागू करने के साथ-साथ लैंड जिहाद, लव जिहाद और मजार जिहाद जैसी जेहादी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया है।
आज राज्य में ऑपरेशन कालनेमि और सघन सत्यापन अभियान के माध्यम से घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
जबकि कांग्रेस ने अपनी वोटबैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के चलते हमारी देवभूमि की डेमोग्राफी से भी खिलवाड़ करने का काम किया है।
बनभूलपुरा का उदाहरण आप सभी ने देखा था।
धामी सरकार ने बनभूलपुरा में दंगाइयों के खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई की थी कि आज भी कोई व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने से पहले सौ बार सोचता है और जिन्होंने कर लिया था वो आजकल स्वयं ही अपने हाथों से उन कब्जों को तोड़ रहे हैं।
पूछता है उत्तराखंड कांग्रेस से जब घुसपैठिए यहां बसाए जा रहे थे, तब आप कहाँ थे?
जब युवाओं का भविष्य नकल माफिया बर्बाद कर रहा था, तब आप कहाँ थे?
जब देवभूमि की पहचान बदली जा रही थी, तब आप क्यों चुप थे?
बोलता है उत्तराखंड कांग्रेस के इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते, क्योंकि उन्हें लैंड जिहाद करने वाले अच्छे लगते हैं…
उन्हें दंगा करने वालों में अपना वोटबैंक दिखता है।
उन्हें जिहाद शब्द पाक लगता है।
ये लोग तब भी धामी सरकार का विरोध करते हैं, जब वे राज्य में पहली बार सख्त भू कानून लागू करते हैं, ये लोग तब भी विरोध करते हैं जब मदरसा बोर्ड को समाप्त करके सभी मदरसों को सरकारी बोर्ड के अधीन लाने का प्रयास धामी ने किया
आखिर ये लोग क्यों उत्तराखंड का विकास नहीं चाहते हैं?
आखिर क्यों ये लोग संतुष्टीकरण की जगह तुष्टीकरण को अपनी नीति बनाएं रखना चाहते हैं?
कुल मिलाकर ये साल कई मायनों में विशेष है, क्योंकि इस वर्ष जहां हमारे राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण हुए हैं, वहीं हमारे मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना का भी ये शताब्दी वर्ष है।
साथ ही, ये उत्तराखंड के लिए भी विशेष है, क्योंकि हाल ही में हमने अपने गौरवशाली राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण किए हैं।
इसलिए आज के इस अवसर पर मैं, ये संकल्प लेता हूँ कि जब तक हम उत्तराखंड को प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी और आत्मनिर्भर नहीं बना देते, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे, आराम से नहीं बैठेंगे।
और मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी के सहयोग और आशीर्वाद से हम सभी मिलकर उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को साकार करने में अवश्य सफल होंगे।
