14 May 2026

धामी सरकार का बड़ा कदम, महिलाओं के सम्मान की रक्षा को हलाला पर हुई ऐतिहासिक कार्रवाई

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धामी सरकार का बड़ा कदम, महिलाओं के सम्मान की रक्षा को हलाला पर हुई ऐतिहासिक कार्रवाई

 

 

 

 

 

 

 

हरिद्वार के बुग्गावाला थाने में समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत उत्तराखंड का पहला हलाला मामला दर्ज किया गया। शाहीन ने पति मोहम्मद दानिश और ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत की। UCC धारा 32, तीन तलाक और दहेज कानून के तहत कार्रवाई।

 

हरिद्वारः उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत हलाला का पहला मामला हरिद्वार पुलिस ने गहनता से छानबीन के बाद दर्ज किया गया है। हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाने में पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर उसके पति और ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

 

क्या है पूरा मामला?

 

शिकायतकर्ता शाहीन ने अपने पति मोहम्मद दानिश और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दानिश पर अपनी पत्नी को प्रताड़ित करने और विवाह से संबंधित अधिकारों के उल्लंघन का आरोप हैं। इस मामले में पुलिस ने आरोपी पति दानिश के खिलाफ समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड 2024 (संशोधन 2026) की धारा 32 (1) (ii) और 32 (1) (iii) के तहत कार्रवाई की है, जो विशेष रूप से हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और दंडनीय बनाती है।

 

इन धाराओं में केस दर्ज

 

पुलिस ने इस मामले में केवल UCC ही नहीं, बल्कि अन्य कड़े कानूनों के तहत भी शिकंजा कसा है। अभियुक्तों पर निम्नलिखित अधिनियमों के तहत आरोप लगाए गए हैं-

 

समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड 2024: धारा 32 (1) (ii) और 32(1)(iii)

 

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और धारा 85

 

मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम, 2019: धारा 3 और 4 (तीन तलाक से संबंधित)

 

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961: धारा 3 और 4

 

एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि बुग्गावाला पुलिस ने इस मामले में गहनता से जांच की और उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने आरोप पत्र तैयार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की के कोर्ट में पेश किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी दानिश के अलावा उसके परिवार के अन्य सदस्यों जैसे पिता मोहम्मद अरशद, परवेज, जावेद और गुलशाना के नाम भी शामिल हैं।

 

यह मामला उत्तराखंड में UCC के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों की रक्षा करने और कुप्रथाओं को समाप्त करने के उद्देश्य से लाया गया है।

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